ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की मिसाल बनी शबनम लता

रिपोर्ट- चतुरानन्द मिश्रा

राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शेखपुरा जिले की जानी-मानी समाजसेवी शबनम लता का नाम विशेष रूप से लिया जाता है। पिछले तीन वर्षों से वे जिले के विभिन्न प्रखंडों में ग्रामीण महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही हैं। उनके प्रयासों से 50 से अधिक निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जिससे हजारों महिलाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। शिक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में अग्रसर शबनम लता न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बना रही हैं, बल्कि ग्रामीण परिवेश में रहने वाली बेटियों के लिए आधुनिक शिक्षा का भी प्रबंध कर रही हैं। उन्होंने निःशुल्क कंप्यूटर शिक्षा की शुरुआत की है, ताकि गाँव की लड़कियाँ भी डिजिटल युग में आगे बढ़ सकें। एक उच्च शिक्षित बेटी और आदर्श बहू के रूप में शबनम लता की चर्चा बिहार के विभिन्न जिलों में हो रही है। उन्होंने साबित किया है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिर्फ प्रेरणा और समर्पण की जरूरत होती है। उनके इस प्रयास से सैकड़ों महिलाएँ आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज को संवारने में योगदान दे रही हैं। महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए खुद का हौसला बढ़ाना होगा” – शबनम लता महिला दिवस के अवसर पर शबनम लता ने अपने संदेश में कहा, “महिला सशक्तिकरण सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक संकल्प होना चाहिए। हमें महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए सिर्फ अवसर नहीं, बल्कि उनका हौसला भी बढ़ाना होगा। जब एक महिला आत्मनिर्भर बनती है, तो पूरा परिवार और समाज मजबूत होता है।” शबनम लता जैसी समाजसेवियों के प्रयासों से न केवल महिलाएँ आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि समाज में एक नई जागरूकता भी आ रही है। उनके इस योगदान को महिला दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

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