फाइलेरिया एवं सर्वजन दवा सेवन को लेकर प्रधानाध्यापकों के बीच प्रशिक्षण कार्यक्रम

रिपोर्ट – न्यूज़ डेस्क

शेखोपुरसराय- आकांक्षी प्रखंड शेखोपुरसराय के प्रखंड संसाधन केंद्र में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें प्रखंड के विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और शिक्षकों ने भाग लिया। इस बैठक का उद्देश्य फाइलेरिया के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा इसके रोकथाम के उपायों पर चर्चा करना था। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक जितेंद्र कुमार एवम प्रखंड समुदाय उत्प्रेरक रंजीत कुमार उपस्थित रहे।
बैठक का संचालन प्रखंड समुदाय उत्प्रेरक रंजीत कुमार एवम पिरामल फाउंडेशन के गांधी फेलो नीलकंठ साहू के द्वारा किया गया। उन्होंने फाइलेरिया की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए इसके कारण, लक्षण और रोकथाम के उपायों पर विस्तृत जानकारी साझा की। लिम्फेटिक फाइलेरियासिस, जिसे आमतौर पर हाथीपांव भी कहा जाता है, एक परजीवी रोग है जो कियुलेक्स नाम मादा के माध्यम से फैलता है। यह बीमारी व्यक्ति के लिम्फेटिक सिस्टम को प्रभावित करती है, जिससे शरीर के विभिन्न हिस्सों में असामान्य सूजन और विकृति हो सकती है। इस रोग से संक्रमित व्यक्ति को गंभीर शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ती है। विशेषज्ञों ने बैठक में इस बात पर जोर दिया कि लिम्फेटिक फाइलेरियासिस को समय पर रोका जा सकता है और सही जागरूकता और दवा सेवन से इसे जड़ से खत्म किया जा सकता है। इसके लिए निम्नलिखित उपाय अपनाने की आवश्यकता है

1. मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) कार्यक्रम के तहत सरकार द्वारा दी जाने वाली फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन अनिवार्य रूप से करें।

2. मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी का उपयोग करें और साफ-सफाई बनाए रखें ।
3. खुले में पानी जमा न होने दें, जिससे मच्छरों के पनपने की संभावना कम हो।

शिक्षकों की भूमिका पर जोर :-
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और शिक्षक इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वे अपने विद्यालयों में छात्रों के माध्यम से परिवारों को जागरूक करने का कार्य कर सकते हैं और उन्हें इस बीमारी से बचाव के उपायों को अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

यह बैठक लिम्फेटिक फाइलेरियासिस को लेकर जागरूकता फैलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयासों से इस बीमारी के प्रति समाज में सही जानकारी और रोकथाम के उपायों को लागू किया जा सकता है।

बैठक के अंत में सभी प्रतिभागियों ने इस विषय पर अपनी सक्रिय भागीदारी और सहयोग देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की । आयोजकों ने आशा व्यक्त की कि शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों के सहयोग से यह जागरूकता अभियान गांव-गांव तक पहुंचेगा और अधिक से अधिक लोगों को इस गंभीर बीमारी से बचाया जा सकेगा।

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