प्रखंड में अमर शहीद “रामफल मंडल” की पुण्यतिथि मनाई गईं

रिपोर्ट – धर्मेन्द्र कुमार

शेखपुरा- घाटकुसुमभा के बेलौनी में 23 अगस्त को बाबा नरपत मल महतो साहेब जी के प्रांगण में बिहार के प्रथम अमर शहीद, भारत छोड़ो आंदोलन के युवा क्रांतिकारी रामफल मंडल जी की पुण्यतिथि मनाई गई. इस अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों से आए लोगों ने रामफल मंडल जी के बलिदान को याद करते हुए उन्हें शत-शत नमन और विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की. इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि रामफल मंडल जी का जन्म बिहार के एक छोटे से गांव में हुआ था. उनके माता-पिता साधारण किसान थे, लेकिन उन्होंने अपने बेटे को उच्च आदर्शों और देशभक्ति की भावना से प्रेरित किया. बचपन से ही रामफल मंडल जी में देशभक्ति का भाव था और जब वह बड़े हुए, तो उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाने का संकल्प लिया.1942 में महात्मा गांधी द्वारा शुरू किए गए ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में सक्रिय रूप से भाग लिया. इस आंदोलन का उद्देश्य अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए मजबूर करना था.रामफल मंडल जी ने इस आंदोलन में अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में लोगों को संगठित किया और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने जनता में आजादी की भावना को जागृत किया. उन्होंने न केवल लोगों को आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया, बल्कि उन्होंने खुद भी सक्रिय रूप से भाग लिया और कई बार अंग्रेजी हुकूमत के अधिकारियों के साथ टकराव में आए. हंसते-हंसते फांसी पर चढ़ने वाले स्वतंत्रता सेनानी रामफल मंडल जी की सक्रियता से अंग्रेजी हुकूमत परेशान हो गई थी.उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया और जेल में डाला गया. 1943 में, उन्हें एक गुप्त बैठक के दौरान गिरफ्तार किया गया था, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम के आगे की योजनाओं पर चर्चा हो रही थी. अंग्रेजी हुकूमत ने उन पर विद्रोह और राजद्रोह के आरोप लगाए और कठोर सजा देने का फैसला किया. रामफल मंडल को अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के साथ फांसी की सजा सुनाई गई.23 अगस्त 1943 को उन्हें हंसते-हंसते फांसी पर चढ़ा दिया गया. फांसी के समय उन्होंने निडर होकर भारत माता की जय के नारे लगाए और अंतिम सांस तक अपने देश के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त किया.

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