क्यों और कब से मनाया जाता है नाग पंचमी, कटहल और आम की सजी बाजार, जमकर हों रही खरीदारी


रिपोर्ट – चतुरानंद मिश्रा

शेखपुरा -ज़िला व पूरे बिहार राज्य में नाग पंचमी पर्व को लेकर छोटे बाजार से लेकर बड़े शहरों तक सनातनी पर्व की शुरुआत नाग पंचमी पर्व से हीं किया जाता हैं। जिसे लेकर आए दिन बाजार में कटहल के कोबे के साथ विभिन्न प्रकार के आम के बाज़ार लगे हुऐ हैं। जहां ग्रामीण व शहरी लोगों के द्वारा जमकर खरीदारी की जा रही हैं । इस संबंध में जानकारी देते हुए श्री मद्भागवत के मशहूर कथा वाचक दिवाकर वेदांश महाराज जी ने बताया की सावन के महीने में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है. इस दिन हर घर में नाग देवता की पूजा की जाती है. और संध्या के समय दूध और धान के लाबे ग्रामीण महीला शिव जो को समर्पण कर अपने अपने घरों में छिटकाव करती है। ताकी उनके घर धन्य धान और सौभाग्य की प्राप्ति हो। नाग पंचमी के बारे में भविष्य पुराण के ब्रह्मा पर्व में नागपंचमी की कथा और उसके व्रत विधान और फल के बारे में विस्तृत वर्णन दिया हुआ है. इसके अलावा स्कंद पुराण के श्रावण महत्व पर्व में भी सनत कुमार को ईश्वर ने नाग पंचमी के बारे में बताया है ।र्व को लेकर क्या है मान्यता?

भविष्य पुराण के ब्रह्मा पर्व में दिए गए नाग पंचमी की कथा के बारे में बताते हैं. इस पुराण के अनुसार सुमंतु मुनि ने शतानीक राजा को नाग पंचमी की कथा के बारे में बताया है. श्रावण शुक्ल पक्ष के पंचमी के दिन नाग लोक में बहुत बड़ा उत्सव होता है. पंचमी तिथि को जो व्यक्ति नागों को गाय के दूध से स्नान कराता है उसके कुल को सभी नाग अभय दान देते हैं. उसके परिवार जनों को सर्प का भय नहीं रहता है. महाभारत में जन्मेजय के नाग यज्ञ की कहानी है. जिसके अनुसार जन्मेजय के नाग यज्ञ के दौरान बड़े-बड़े विकराल नाग अग्नि में आकर जलने लगे. उस समय आस्तिक नामक ब्राह्मण सर्प यज्ञ रोककर नागों की रक्षा की थी यह पंचमी की तिथि थी. पूजा के दिन क्या करें?
ऐसे में नागों को पंचमी की तिथि बहुत प्यारी है इस दिन मिट्टी के नाग बनाना चाहिए. उनकी पूजा करना चाहिए उनके ऊपर दुग्ध स्नान कराना चाहिए तदोपरांत उन्हें विश्व रचित कर ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए. इस प्रकार नियम अनुसार जो पंचमी को नागों का पूजन करता है उसे पर नागों की विशेष कृपा रहती है.भविष्य पुराण में सांपों के लक्षण स्वरूप और जातियों के बारे में भी वृहद वर्णन भी है. इससे पता लगता है कि हमारे पुराने ऋषि मनीषियों को सर्पों के बारे में कितना ज्ञान था. पूजा की विधि
स्कंद पुराण में भी नाग पंचमी के व्रत के बारे में कहा गया है उसमें ब्रह्मा जी ने बताया है कि चतुर्थी तिथि को एक बार भोजन करें और पंचमी को नक्त भोजन करें. स्वर्ण, चाँदी, काष्ठ अथवा मिटटी का पाँच फणों वाला सुन्दर नाग बनाकर पंचमी के दिन उस नाग की भक्तिपूर्वक पूजा करनी चाहिए. द्वार के दोनों ओर गोबर से बड़े-बड़े नाग बनाए और दधि, शुभ दुर्वांकुरों, कनेर-मालती-चमेली-चम्पा के फूलों, गंधों, अक्षतों, धूपों तथा मनोहर दीपों से उनकी विधिवत पूजा करें. उसके बाद ब्राह्मणों को घृत, मोदक तथा खीर का भोजन कराएं. इसके बाद अनंत, वासुकि, शेष, पद्मनाभ, कम्बल, कर्कोटक, अश्व, आठवाँ धृतराष्ट्र, शंखपाल, कालीय तथा तक्षक – इन सब नागकुल के अधिपतियों को तथा इनकी माता कद्रू को भी हल्दी और चन्दन से दीवार पर लिखकर फूलों आदि से इनकी पूजा करें .सनातन धर्म में नाग पंचमी के बहाने नागों की रक्षण का व्रत लिया जाता है.नागों की रक्षा से पर्यावरण संतुलित रहता है.बेहद जरूरी है सांप का रहना सांप सामान्यतया किसानों के लिए हितकारी हैं.सांप फसलों को नष्ट करने वाले कीड़े पतंगों को खा जाते हैं जिससे की फसलें अच्छी होती हैं. सांप फसलों को खाने वाले चूहों को भी खा जाते हैं . इस प्रकार हमारे फसल चक्र के लिए सांप एक आवश्यक प्राणी है.

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