शेखपुरा के गिरिहिंडा पहाड़ का क्या है इतिहास, क्यों है प्रचलित

रिपोर्ट – धर्मेन्द्र कुमार

शेखपुरा जिला बिहार राज्य के 38वें जिले में से एक है जहां बहुत ही रमणीक स्थान हैं, जिनमें से एक है ‘गिरिहिंडा़ पर्वत’

गिरिहिंडा पहाड़ शेखपुरा जिले की पहचान है। गिरिहिंडा पहाड़ करीब 800 फीट ऊंचा है। इसी पहाड़ की चोटी पर शिव पार्वती मंदिर स्थित है। जिसे बाबा कामेश्वर नाथ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

मान्यता के अनुसार इस मंदिर का निर्माण महाभारत काल में हुआ था। कहा जाता है कि महाभारत काल में हिडिम्भ नाम का राक्षस इसी गिरिहिण्डा पर्वत की चोटी पर रहता था। जब पांडव पुत्रों को वनवास काल भोगना पड़ा तो अर्जुन के बड़े भाई गदाधारी भीम कुछ समय के लिए इसी गिरिहिण्डा पर्वत पर रुके थे। इस दौरान उन्होंने हिडिम्भा के साथ गंधर्व विवाह भी किया था। जिससे घटोत्कच्छ नाम का राक्षस पैदा हुआ। मान्यता के अनुसार गदाधारी भीम ने ही गिरिहिण्डा पर्वत पर इस शिवलिंग की स्थापना की थी। इसके बाद भगवान शिव के आदेश के बाद विश्वकर्मा जी ने रातों-रात इस मंदिर का निर्माण किया था। जिसे बाद में शिव पार्वती मंदिर या बाबा कामेश्वर नाथ मंदिर के नाम से जाना जाने लगा।

मान्यता है कि इस मंदिर में आकर पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों को मनचाहा फल मिलता है और संतान की प्राप्ति होती है। खास तौर पर सावन के महीने में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। सावन महीने में यहां बड़ी संख्या में भक्त आते हैं और बाबा का जलाभिषेक करते हैं। शिवरात्रि के दौरान मंदिर में पूजा-अर्चना करने का भी विशेष महत्व है। ज्योतिषियों के अनुसार अगर निःसंतान दंपत्ति बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करें तो उन्हें पुत्र की प्राप्ति होती हैएवं मनोकामना पूर्ण होती है. 

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