💐 शादी की कहानी – “रामजन्म और विट्टू का पवित्र संगम” 💐

(सौरव कुमार की ओर से लिखित संदेश)
आज का दिन पूरे गाँव के लिए किसी त्योहार से कम नहीं था।
शेखोपुर डीह (जिला शेखपुरा) में खुशियों की बारिश हो रही थी, क्योंकि घर में आज के दिन एक नहीं, दो परिवारों का मिलन होने वाला था।
दूल्हा रामजन्म कुमार, जिसने अपनी विनम्रता और सादगी से सबका दिल जीत लिया था, आज अपनी जीवनसंगिनी को लेने जा रहा था—
माताशी गाँव (जिला लखीसराय) की चाँद-सी सुंदर दुल्हन विट्टू कुमारी।
जब बरात माताशी पहुँची, ढोल-नगाड़ों की गूंज हवा में तैरने लगी।
विट्टू लाल जोड़े में ऐसी लग रही थी जैसे स्वर्ग की अप्सरा धरती पर उतर आई हो।
रामजन्म की आँखों में चमक थी, जैसे उसने अपनी पूरी दुनिया उसी एक पल में देख ली हो।
जब जयमाला का समय आया, दोनों ने एक-दूसरे को मुस्कुराकर हार पहनाया—
मानो दिलों ने चुपचाप एक-दूसरे से कहा हो—
“अब जो भी होगा, हम दोनों साथ निभाएँगे।”
उस पवित्र पल को देखकर मैं—सौरव कुमार (लड़के का बहनोई)—अपने भावनाओं को रोक नहीं पाया और दिल से ये शायरी निकल पड़ी—

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💞 सौरव कुमार की ओर से शायरी 💞
“शेखोपुर डीह का शेर है मेरा साला रामजन्म,
माताशी की चाँद है भाभी विट्टू कुमारी हमदम।
दोनों की जोड़ी पर रब की रहमत हमेशा बरसे,
हर पल महके इनकी ज़िंदगी प्यार के संगम।”
“सात फेरे लेकर दो दिल जब एक हो गए,
ज़िंदगी के हर सफ़र के साथी बन गए।
दुआ है मेरी—ये खुशियाँ कभी कम न हों,
मेरे साला-भाभी हमेशा मुस्कुराते रहें।”

फेरे के दौरान अग्नि की लौ जैसे उनके वचनों की साक्षी बन रही थी।
एक-एक कदम पर दो परिवार और करीब आ रहे थे।
दोनों की मुस्कान ने बतला दिया कि यह रिश्ता सिर्फ आज का नहीं—
जन्मों-जन्मों का बंधन है।
जब विदाई की घड़ी आई, माताशी गाँव में आँखें नम थीं,
पर दिल खुश था कि विट्टू को इतना नेकदिल जीवनसाथी मिला।
उधर शेखोपुर डीह में सब बेसब्री से अपनी नई बहू के स्वागत को तैयार थे।
और अंत में मैंने, सौरव कुमार ने, पूरे दिल से आशीर्वाद दिया—
“रामजन्म और विट्टू की जोड़ी ऐसे ही खिलती रहे,
जैसे सुबह की पहली रोशनी दिलों को छू जाती है।”
🌸 समाप्त 🌸









