रिपोर्ट – चतुरानन्द मिश्रा

शेखपुरा- बढ़ती ठंड ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। खासकर गरीब तबके के लोग, जो दिहाड़ी मजदूरी कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं, ठंड से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कड़ाके की ठंड न केवल उनके कामकाज को प्रभावित कर रही है, बल्कि उनके स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डाल रही है।
दूसरी ओर, सरकारी विद्यालयों में नियमित कक्षाओं के संचालन के कारण बच्चों की सेहत पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। बिहार सरकार के निर्देशानुसार, सरकारी विद्यालय नियमित रूप से संचालित हो रहे हैं। इसी क्रम में शेखपुरा जिले के कुटौत हाई स्कूल में शुक्रवार को ठंड के कारण बड़ी घटना सामने आई। यहां कक्षा के दौरान ठंड से कांपते हुए सात बच्चे और एक शिक्षिका बेहोश हो गए।
स्कूल के शिक्षकों और कर्मचारियों ने स्थिति को तुरंत संभालते हुए एंबुलेंस बुलाया। शिक्षक संजीत प्रभाकर ने तत्काल अस्पताल प्रबंधन से संपर्क किया, और सभी बेहोश बच्चों और शिक्षिका को वरीय चिकित्सक डॉक्टर फैजल के पास इलाज के लिए भेजा गया। फिलहाल, सभी का इलाज चल रहा है और वे सुरक्षित हैं।
ठंड का सबसे बड़ा प्रभाव दिहाड़ी मजदूरों और गरीब तबके के लोगों पर पड़ा है। न तो उनके पास पर्याप्त गर्म कपड़े हैं, और न ही ठंड से बचने के लिए पर्याप्त संसाधन। ऐसे में ठंड उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती है। जहां सरकारी स्कूलों में ठंड का असर बच्चों की सेहत पर दिख रहा है, वहीं जिले के दर्जनों निजी विद्यालय और कोचिंग संस्थान भी ठंड के बावजूद नियमित रूप से संचालित हो रहे हैं।
हालांकि, निजी संचालकों ने ठंड से बचने के लिए बच्चों के बैठने की विशेष व्यवस्था की है। इसके बावजूद अभिभावक बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। शेखपुरा के जिला अधिकारी ने स्थिति का संज्ञान लेते हुए सभी सरकारी और निजी स्कूलों को ठंड को देखते हुए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश भी जारी कर सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में, प्रशासन और सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वे गरीब और असहाय लोगों के लिए ठंड से बचाव के इंतजाम करें।
अलाव की व्यवस्था, गर्म कपड़ों का वितरण और स्कूलों में अवकाश का निर्णय ठंड के प्रभाव को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। बढ़ती ठंड के बीच स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में समुचित प्रबंधन और जनसहभागिता से ही इस संकट का समाधान किया जा सकता है।









