साहस को सम्मान देना हमारी प्रथमिकता है- शबनम लता

रिपोर्ट – चतुरानन्द मिश्रा

आज़ शेखपुरा ज़िला हीं नहीं बिहार राज्य सहित पुरा भारत देश साहसी सौरभ की कहानी पढ़ा रहा है । जिसने दस वर्ष के उम्र में वह साहस कर दिखाया है। जो अकल्पनीय है। अपनी जान की प्रवाह न करते हुए शेखपुरा जिला के शेखोपुर सराय प्रखंड के किशनपुर का एक गरीब का बेटा सौरभ ने तलाब में छलांग लगाकर चार डूबती हुई बेटियों में से तीन का जान बचाने में महारथ हासिल कर लिया। एक एसे गरीब परिवार के बेटे जिन्हें रात में सोने के लिए उसके सर पर भी सहारा न के बराबर है। जिसके घर के दरवाजे तक भी सही नही है। फिर डर किस बात की जिसकी रक्षा स्वयं ईश्वर करता है। जी हां। यहां अपनी गरीबताई से ख़ुद को जूझना है। साहब और एसे गरीब के खून भी चूस सफ़ल वेक्ती और सफ़ल होने की अपेक्षा रखते हैं। भला हों उस ईश्वर का जिसने गरीब माता पिता के यहां सौरभ को जन्म दिया है। पर जिगरा बहुत बडा देकर भेजा है। जी हां एसी हीं कहानी है। साहसी बालक सौरभ कुमार का येदि किन्हीं बंधु बांधव को मन कर रहा है। की जरा साहसी बालक से मिलें तो कृपा कर इनके जिगर की तूलना अपने जिगर के टुकड़े से मत कर लेना। येदी आप ने ऐसा किया तो आपके रूह कांप उठेंगे। क्यूं की सौरभ हकीकत में मिट्टी का लाल है। जिसे किसी प्रकार से दो वक्त की रोटी माता पिता और अपने स्वयं के बदौलत मिल जाती है। रहने लाइक घर नहीं पहहनने लाइक कपड़ा नहीं, खाने लाइक भोजन नहीं, तो पर भी आवास के लिए सक्षम लोगों ने चुना लगाया। जरा सोचिए मान्यवर आप सक्षम हैं। और एसे अपबादित गरीब के बच्चे के अन्दर छुपी बडी प्रतिभा को आप भली भांति पहचान सकते हैं। आप सामर्थवान हैं। महोदय आप हजारों और लाखों रूपए चंद मिनटों में अपने यश कमाने के लिए खर्च कर सकते हैं। परंतु येदि आपके नज़र में एसे बच्चे की छाया पड़ जाए तो इनका दशा और दिशा दोनों में सुधार तो होगा हीं। आप भी अपने आप को धन्य कर सकते हैं। जिस समय सौरभ अपने शौर्य को प्रकाशमान करेगा तो उसकी रोशनी में आप का प्रतिविंव अग्र दिशा में दिखाई देंगी। कहा भी जाता है कि कृति को काल भी नही खाता फिर चाहे वो आप हों या साहसी बालक सौरभ आज़ जिसकी कहानी दुनिया पढ़ रही और देख रही है। इसके द्वारा दिखाए गए साहस और बहादुरी कभी नही मर सकता है। दस वर्षीय सौरभ का शौर्य ता जीवन किशनपुर के ग्रामीण और शेखपुरा वासी याद करेंगे। सौरभ के शौर्य कहानी अखबार में पढ़ते हीं पटना एल आर फाऊंडेशन निदेशक शबनम लता ने रविवार के दिन किशनपुर गांव में सर्वप्रथम पहुंच कर साहसी बालक को सम्मानित हीं नहीं क्या उसके नाम से हीं गांव में बच्चों के उत्तम शिक्षा के लिए निः शुल्क कोचिंग की स्थापना कर दिया। और उनके माता पिता से मिलकर सौरभ को शुरु से हीं तैराकी सीखने के लिए विशेष ट्रेनिंग दिलाने का भी ऐलान किया है। साथ हीं साहसी बालक के माता पिता को हर संभव मदद देने का वादा भी किया। वैगर कोई पद के शबनम लता ने सैंकड़ों गांवों में गरीब मेधावी विद्यार्थियों को निः शुल्क कोचिंग की शिक्षा दिलाने और महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने के लिए सैंकड़ों सिलाई कढ़ाई प्रशिक्षण केंद्र का संचालन करवा रही हैं। जहां सैकड़ों महिलाएं प्रशिक्षित होकर अपना जीवकोपार्जन करने में जुड़ी हैं। शेखपुरा और नालंदा की महिलाएं और पुरुष इन्हें अपना मसीहा मानते हैं। निदेशक शबनम लता ने कहा कि साहस और प्रोत्साहन एक दूसरे को साहसी बनाता है। हम अपने आर्थिक, शरीरिक और मानसिक शक्ति के अनुसार ही हम अपना लक्ष्य बनाते हैं और जब हम उसे प्राप्त कर लेते हैं । तो हमें एक जीत का एहसास होता है जो हमे सच्चा सुख देता हैं यही सफलता कहलाता हैं सफलता कभी भी आसान नहीं होती, लेकिन लगन जरूर लगती है । सीखने की कभी उम्र नहीं होती जिसका सबूत ये साहसी बालक सौरभ है। इसके उम्र के बचे लड़ाई झगडे डर भय से भयभीत होते रहते है। परंतु सौरभ ने सबको विपरीत कर साबित कर दिया की किसी भी चीज़ को सीखने का कोई उम्र नहीं होता। दस वर्ष के उम्र में स्वयं से तैराकी सीखना और उसका उपयोग कर तीन की जान बचाना काबिले तारीफ़ है। उन्होंने साफ़ कहा की देखते हैं। इसकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने में जिला प्रशासन राज्य सरकार और केंद सरकार किया कुछ करती हैं।

 

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