उज्जवला योजना के सपनों में खोई ग्रामीण महिला को मिट्टी के बने चूल्हे हीं एक मात्र विकल्प

रिपोर्ट – चतुरानन्द मिश्रा
शेखोपुरसराय- प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों के महिला अपने रसोई घर को व्यवस्थित करने जुटी हुई है। ताकी येन केन तरीके से दो वक्त के लिए रोटी सेक सके। महिला रसोई घर के चूल्हे को लेकर चिंतित है। कमर तोड़ मंहगाई ने गरीब और माध्यम वर्ग के लोगों के लिए लगातर समस्या उत्पन्न कर रहा है। साग सब्जी से लेकर रसोईघर के चूल्हे में भी उदासिंता देखी जा रही है। रसोई घर के महिलाओं का कहना है कि 1 मई वर्ष 2016 में देश के प्रधानमंत्री के द्वारा महिलाओं के लिए उज्जवला योजना लाया गया था। जिसमें गैस चूल्हे पर खाना पकाना और वातावरण को स्वच्छ रखने हेतू महिलाओं को सम्मान मिलने की बात कहीं गई थीं। इस दौरान सैकड़ो, हजारों महिलाओं ने उज्जवला योजना के तहत् गैस का कनेक्शन लिया था। उस समय महज पांच सौ रूपए में एक महीने तक रसोई घर के चूल्हे पर खाना पका कर ग्रामीण महिला खुश थी। परंतु देखते हीं देखते गैस सिलेंडर की महंगाई आसमान छू गई। और पुनः गांव धुआं धुआं होना चालु हो गया। अब ग्रामीण महिलाएं मिट्टी के चूल्हे पर ख़ुद को निर्भर बना रही है। घरेलू महिलाऐं कहती है कि पूराने चीजों पर हीं अपना विश्वास अडिग था है रह सकेगा। गरीब के लिए एक हज़ार रूपए बाली गैस सिलेंडर ने तो उनकी कमर तोड दी है। 
ग्रामीण महीला पूनम देवी, रीना देवी, उषा देवी ने बताया की हम गरीब औरतों किस तरह से अपना जीवन व्यतीत करते हैं। ये हम हीं जानते हैं। हज़ार रूपए के राशन से अपना महीना तक का खर्च चलाते हैं। यदि एक हज़ार का सिर्फ़ गैस भराएंगे तो पूरे परिवार का पेट कहां से भर सकेगा। उन्होंने साफ़ कहा की उज्जवला योजना के तहत् दिए गए गैस सिलेंडर से हम गरीबों को किया फायदा जो बढ़ती मंहगाई में भी हमारी मदद नहीं करती। आज़ कल गैस के दाम लगभग नौ सौ रूपए हैं। यदि गैस को घर तक डिलेवरी दी जाती है। तो उप्पर से तीस से पाचस रूपए तक डिलेवरी चार्ज जोड़ा जाता है। येसे इस योजना का किया फायदा।









