गाँव में नल जल योजना का दुरुपयोग: खेत पटवन में हो रहा पानी का इस्तेमाल

रिपोर्ट – न्यूज़ डेस्क

चेवाड़ा – बिहार सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट नल जल योजना, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ और पीने योग्य पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, अब अपने उद्देश्य से भटकता नजर आ रहा है। शेखपुरा जिले के चेवाड़ा प्रखंड स्थित धमसेना गाँव में इस योजना का घोर दुरुपयोग सामने आया है। इस योजना के तहत बनाए गए जल टैंकों और पाइपलाइनों का उपयोग ग्रामीणों द्वारा अपने निजी कार्यों, विशेष रूप से खेतों की सिंचाई के लिए किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने खोली पोल

धमसेना गाँव में नल जल योजना के दुरुपयोग का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि जल टंकी से पाइप जोड़कर खेत पटवन का काम किया जा रहा है। यह दृश्य योजना के मूल उद्देश्य पर बड़ा सवाल खड़ा करता है और इसके क्रियान्वयन में हो रही लापरवाही को उजागर करता है।

ग्रामीणों को नहीं मिल रहा स्वच्छ पानी

धमसेना गाँव के ग्रामीणों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद उन्हें स्वच्छ और पीने योग्य पानी नहीं मिल पा रहा है। जबकि योजना का उद्देश्य था कि हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंचे। इसके बजाय दबंग लोग नल जल योजना के पानी का इस्तेमाल अपने निजी खेतों की सिंचाई में कर रहे हैं। ग्रामीणों ने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा कि इस लापरवाही और दुरुपयोग की वजह से वे स्वच्छ पानी से वंचित हो रहे हैं।

पीएचईडी विभाग पर उठे सवाल

इस मामले ने पीएचईडी (जनस्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग) के अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पीएचईडी के जूनियर इंजीनियर (जेईई) और अन्य जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को सही तरीके से नहीं निभा रहे हैं। इस लापरवाही का खामियाजा गाँव के असहाय और जरूरतमंद लोग भुगत रहे हैं।

दबंगों की मनमानी

ग्रामीणों का कहना है कि दबंग लोग खुलेआम टंकी से पाइप जोड़कर अपने खेतों की सिंचाई कर रहे हैं। इसकी वजह से योजना का उद्देश्य पूरी तरह से विफल हो रहा है। नल जल योजना का पानी, जो ग्रामीणों को उनके घरों में पीने के लिए मिलना चाहिए था, खेतों में व्यर्थ बहाया जा रहा है।

जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग

गाँव के कई जागरूक लोगों ने इस मामले में जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि इस प्रकार की दबंगई और अवैध उपयोग पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए। उन्होंने जिला अधिकारी से अपील की है कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और सुनिश्चित किया जाए कि योजना के तहत हर ग्रामीण को स्वच्छ और पीने योग्य पानी मिले।

नल जल योजना पर मंडराता सवालिया निशान

यह घटना नल जल योजना की सफलता और क्रियान्वयन पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए भारी मात्रा में धनराशि खर्च की गई है, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीण अपनी मूलभूत आवश्यकता—स्वच्छ पानी—से वंचित हैं।
धमसेना ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस मामले में जल्द ही हस्तक्षेप करेगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा। साथ ही, यह सुनिश्चित करेगा कि योजना का लाभ सही लोगों तक पहुंचे। इस प्रकार की घटनाएँ न केवल सरकार की छवि को धूमिल करती हैं, बल्कि जरूरतमंद लोगों के अधिकारों का भी हनन करती हैं।
धमसेना गाँव की घटना ने नल जल योजना के क्रियान्वयन में हो रही खामियों को उजागर किया है। यह जरूरी है कि ऐसे मामलों पर तत्काल ध्यान दिया जाए, ताकि सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ सही लोगों तक पहुँच सके। जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि वह इस मामले में सख्त कदम उठाए और ग्रामीणों को उनका अधिकार दिलाए।

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