पुलिस के हाथ अभी भी खाली, एक्सिस बैंक लूट कांड में महीना बाद भी नहीं मिला कोई सुराग, पुलिस कर रही है काफ़ी मेहनत


रिपोर्ट – चतुरानंद मिश्रा

शेखपुरा – बरबीघा एक्सिस बैंक लूट कांड पिछले महीने 1 जून को हुईं थीं। 1 जून सोमवार की सुबह बरबीघा के बिहारशरीफ मार्ग पर स्थित एक्सिस बैंक की शाखा से बेखौफ हथियारबंद अपराधियों ने बैंक खुलने के कुछ ही देर बाद शाखा के अंदर लुटेरा प्रवेश किया और बैंक प्रबंधक समेत कर्मियों एवं ग्राहकों को बंदूक की नोक पर शौचालय में बंद कर दिया और बैंक के लॉकर में रखा 28 लाख रुपये लेकर बड़े आराम से चलते बने। आज़ पूरे 1 महीने के बाद भी अपराधी पुलिस के चुंगल से फरार हैं। जिसको लेकर शेखपुरा पुलिस कप्तान बलिराम चौधरी ने सीसीटीवी फूटेज में कैद हुए अपराधियों को पहचानने वाले गूप्त रुप से सूचित करने वाले को पचास हज़ार रूपए का नगद ईनाम भी रखा है । तदोपरान्त भी बैंक लुटेरे का आज़ तक कोइ सुराग नहीं मिल सका है । और पुलिस प्रशासन यूं हीं हाथ पर हाथ रखें बैठा है।

इस तरीके से लुटेरों ने लुटा था बैंक, बहुत सारे प्रश्न होते हैं खड़े

बैंक लूट के अपराधी ने इस प्लान के तहत कांड को दिया था अंजाम । ऐसे बैंक कर्मीयों के उप्पर भी बहुत सारे प्रश्न चिन्ह लगते हैं। अब आईये जानते है कैसे घटी थीं घटना. अपराधी बैग और कमर में पिस्तौल लेकर बैंक में आराम से बैठ गया था। लेकिन बैंक के सुरक्षाकर्मी ने कोई ध्यान नहीं दिया था । बैग लेकर बैंक में प्रवेश करने पर ना उसकी जांच की गई और ना उससे कोई पूछताछ की गई। पूछे जाने पर बैंक प्रबंधक अभिषेक कुमार ने बताया था कि लॉकर का सायरन पटना के मुख्य ब्रांच से लॉक होता है। आखिर क्यों लॉकर खोले जाने पर कोई सायरन नहीं बजता है। तो क्या लॉकर कोइ भी बैंक कर्मी और ग्राहक खोल सकते हैं? फिर बैंक सुरक्षित कहां रहा ? बैंक में मोटे रूपए होने की जानकारी अपराधियों तक कैसे पहुंचती है? बैंक का अधिकाश कांड उसी उसी दिन होता है। जिस दिन बैंक में कुछ विशेष माल रखे होते हैं। क्यूं वही घटना मिशन थाना क्षेत्र अंतर्गत श्रीकृष्ण चौक से महज 100 मीटर दुरी श्री गणेश काम्प्लेक्स के पहले तले पर एक्सिस बैंक में घटी थी जहां निकट में 2 पुलिस थाना रहने के बावजूद कांड हुआ़ था। अब येसे में सवाल खड़ा होता है की जो बैंक में प्राइवेट सिक्योरिटी कार्यरत थे उन्होंने बैंक में आते जाते ग्राहक का जांच क्यों नहीं किया। बैंक के पास गरीब अमीर लोगो के लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। फिर सायरन को पटना मेन ब्रांच से बंद क्यूं रखा गया था। कोई भी बैंक सुरक्षा के उद्देश्य से अपराध नियंत्रित करने के लिए कार्य करता है। बैंक के द्वारा नईं तकनीकी क्यों नहीं अपनाई जाती है। जो क्विक में नजदीकी थाने को सूचित करने का काम करे। बैंक में हथियार लेकर प्रवेश करते हीं गुप्त उपकरण एक्टिव हो कर तुरंत स्थानीय थाने को सुचित कर दे। आखिर इतने पैसे के लूट को लेकर बैंको के दरबाजे पर ही मेटल डिटेक्टर क्यों नहीं लगाये जाते हैं जो की बजारों में कम दामों पर उपलब्ध है. बैंक के अधिकारी आखिर क्यों करते हैं मनमानी. हालांकि जिला पुलिस 1 महीने से इस कदर अपराधी को ढूंढ़ रही है की अपराधी जहाँ भी हो उसे सलाखों के अंदर जाना तय है जहाँ आज एसपी बलिराम कुमार चौधरी ने अपराधी को ढूंढने के लिए कई जिलों से तार साधे हुये हैं. जल्द ही हो सकती है गिरफ्तारी. अपराध पर नियंत्रण के नाम से जानने बाले बलिराम कुमार चौधरी जिला में कई करनामें दिखा चुके है. 

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