रिपोर्ट – डेस्क न्यूज़

शेखपुरा – मुहर्रम की दसवीं तिथि पर बुधवार को शेखपुरा में शिया समुदाय के मुसलमानों ने मातम जुलूस निकाला। यह मातम जुलूस तरछा स्थित इमामबाड़ा से बड़ी दरगाह स्थित कर्बला तक निकाला गया। मातम जुलूस में सैकड़ों की संख्या में शिया समुदाय के युवा। किशोर, अधेड़ और बुजुर्ग शामिल हुए। इमामबाड़ा से कर्बला तक एक किमी से कम दूरी तय करने में मातम जुलूस को तीन घंटे लगे। मातम जुलूस में शामिल लोगों ने अपने शरीर पर स्वयं से जंजीर और छुरी से वार करके कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों के बलिदान को याद किया।
कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन पर हुए हमले को स्वयं पर चाकू और जंजीर से हमला करके अनुभव किया। मातम जुलूस में शामिल लोगों ने कर्बला के युद्ध से जुड़े मातम गीत भी गए। बड़ी दरगाह स्थित शिया कर्बला में मातम जुलूस का विसर्जन किया गया। आयोजन से जुड़े मुसी रजा,सबा हुसैन ने बताया कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन ने अपने 72 सहयोगियों के साथ सत्य और न्याय की खातिर लड़ते हुए अपना बलिदान दिया था। इमाम हुसैन के इस बलिदान को समूची दुनिया में लोग याद करते हैं। कहा इमाम हुसैन ने सच्चाई की राह पर चलते हुए अपना बलिदान दिया,जो आज भी अनुकरणीय है। बुधवार को विसर्जन के साथ ही दस दिनों से चल रहा कार्यक्रम संपन्न हो गया। मुहर्रम की दसवीं तिथि को रात्री में सुन्नी मुसलमानों ने ताजिया निकाला। विभिन्न अखाड़ों से निकाला गया ताजिया का विसर्जन लालबाग स्थित कर्बला में किया गया। ताजिया जुलूस में सुन्नी मुसलमानों ने परंपरागत युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया। मुहर्रम को लेकर जिला प्रशसन ने सुरक्षा के भी कड़े प्रबंध किए हैं।









